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Title: Tum Ek Post by: Vatsal on January 22, 2006, 01:08:59 AM तुम एक ख़्वाब की नदी सी मुझमें जो बहती हो अलसाए दिन ढ़ोते हैं उनींदी रातों को मैं जानता नहीं ये क्या है मैं सोचता नहीं ये क्यों है हर बार तुम्हे मिटाता हूँ हर बार तुम बन जाती हो एक ख़्वाब की नदी सी ...
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